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Conch Benefits

शंख से लाभ

It is believed that in the house where there is a conch, there is a residence of Lakshmi. In religious texts, the conch is described as the brother of Lakshmi, because like Lakshmi, the conch also originated from the ocean. The conch is counted among the fourteen gems derived from the churning of the sea.

ऐसी मान्यता है कि जिस घर में शंख होता है, वहां लक्ष्मी का वास होता है. धार्मिक ग्रंथों में शंख को लक्ष्मी का भाई बताया गया है, क्योंकि लक्ष्मी की तरह शंख भी सागर से ही उत्पन्न हुआ है. शंख की गिनती समुद्र मंथन से निकले चौदह रत्नों में होती है।

The conch is also considered auspicious because both Goddess Lakshmi and Lord Vishnu hold it in their hands.

शंख को इसलिए भी शुभ माना गया है, क्योंकि माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु, दोनों ही अपने हाथों में इसे धारण करते हैं।

Playing conch shells in the rituals of worship makes the atmosphere pure. As far as its voice goes, positive thoughts are generated in the minds of people by listening to it. The fruit of good thoughts is also naturally better.

पूजा-पाठ में शंख बजाने से वातावरण पवित्र होता है. जहां तक इसकी आवाज जाती है, इसे सुनकर लोगों के मन में सकारात्मक विचार पैदा होते हैं. अच्छे विचारों का फल भी स्वाभाविक रूप से बेहतर ही होता है।

The anointing of Shiva, Lakshmi etc. with the water of conch shell pleases God and gets his grace.

शंख के जल से िव, लक्ष्मी आदि का अभिषेक करने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है।

It is said in the Brahmavaivarta Purana that by keeping water in the conch and sprinkling it, the atmosphere is purified.

ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि शंख में जल रखने और इसे िड़कने से वातावरण शुद्ध होता है.

Scientists believe that many types of bacteria and germs present in the environment are destroyed by the sound of a conch shell. Many tests have yielded similar results.

वैज्ञानिकों का मानना है कि शंख की आवाज से वातावरण में मौजूद कई तरह के जीवाणुओं-कीटाणुओं का नाश हो जाता है. कई टेस्ट से इस तरह के नतीजे मिले हैं.|

According to Ayurveda, the use of Shankhodak Bhasma cures many types of diseases like stomach diseases, stones, jaundice etc. However, it should be used only on the advice of expert Vaidya.

आयुर्वेद के मुताबिक, शंखोदक के भस्म के उपयोग से पेट की बीमारियां, पथरी, पीलिया आदि कई तरह की बीमारियां दूर होती हैं. हालांकि इसका उपयोग एक्सपर्ट वैद्य की सलाह से ही किया जाना चाहिए।

Playing the conch exercises the lungs. It is mentioned in the Puranas that if the patient breathes as a rule, he can be free from disease.

शंख बजाने से फेफड़े का व्यायाम होता है. पुराणों के जिक्र मिलता है कि अगर श्वास का रोगी नियमि तौर पर शंख बजाए, तो वह बीमारी से मुक्त हो सकता है।

– चंद्र शंख ₹250
– संयुक्त शंख गोमती चक्र कौड़ी सीप ₹1100
– मादा शंख ₹350
– राहु केतु शंख ₹300
– सीप ₹350
– सुदर्शन शंख ₹300
– सूर्य शंख ₹200
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