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KANSA GLASS – काँसा गिलास

KGKG

Rs.940

Advantages of Kansa utensils:

कांसा  बर्तन  के फायदे :

According to Ayurveda, it enhances intelligence.

आयुर्वेद के अनुसार, यह बुद्धि को बढ़ाता है।

It is believed that the use of Kansa in addition to purifying our food and drinking water on a daily basis enhances our immunity.

यह माना जाता है कि कांसा का उपयोग हमारे भोजन को शुद्ध करने और दैनिक आधार पर पीने के पानी के अलावा हमारी प्रतिरक्षा को बढ़ाता है।

Kansa is a good conductor of heat and retains heat well while keeping foods and its contents longer.

कांसा गर्मी का एक अच्छा संवाहक है और खाद्य पदार्थों और इसकी सामग्री को अधिक समय तक बनाए रखते हुए गर्मी को अच्छी तरह से बरकरार रखता है।

Kansa utensils disinfect objects based on the type and concentration of pathogens and the medium in which they occur kills these microorganisms from minutes to hours of exposure.

कांसा के बर्तन रोगजनकों के प्रकार और सांद्रता के आधार पर वस्तुओं को कीटाणुरहित करते हैं और जिस माध्यम में वे होते हैं वह इन सूक्ष्म जीवाणुओं को मिनटों से घंटों के संपर्क में मार देता है।

The potential efficacy of its components improves indoor air quality.

इसके घटकों की संभावित प्रभावकारिता इनडोर वायु गुणवत्ता में सुधार करती है।

It is suitable for daily use because it is wear and tear resistant, bright, scratch and wrinkle resistant for decades.

यह दैनिक उपयोग के लिए उपयुक्त है क्योंकि यह पहनने और आंसू प्रतिरोधी, उज्ज्वल, खरोंच और दशकों के लिए शिकन प्रतिरोधी है।

It is equally valuable after damage, as about 90% of all metals are recycled.

यह क्षति के बाद समान रूप से मूल्यवान है, क्योंकि सभी धातुओं का लगभग 90% पुनर्नवीनीकरण किया जाता है।

Product Dimension
L10CM , B6.5CM CM
Product Weight
185 Gram
Packet Weight
nil Gram
Packet Dimension
nil Gram

Description

Bronze glass:-

Let|| Jai Chakradhari ||

Pewter Glass: -

Let's talk about another unresolved aspect.

"Metal - Bronze"

Society has made a place in every house today, steel and aluminum utensils - people have become so careless about their culture, that they discard the scientific object of every Indian from their point of view.

 Aluminum and steel are a storehouse of diseases, do not know when the new era will understand it.

 The house that people go to, they are welded with steel cups made of steel or aluminum or shredded with bones, and praise them, how well you are doing.

 Tell them - throw away these fake utensils - then any person can face trouble.

Kansa - There is a yoga, in which the combination of vang and copper is done.

The ratio of which changes the ability of things - such as - for utensils - a ratio of 1: 4, a ratio of 1: 3 for Ghughru, for a gun shot - 100: 10: 2, copper, wood, snake.

Well, the basic thing is ours today - if food is served in Kansi, which does not end the ability to eat, as well as the communication of those energy is through food, which - relaxes the eye disease, relaxes the worm disease, Even it is beneficial in skin diseases.

Now the science of India is so precise - how to be eligible for food, it also looks at human welfare.

What can be more subtle than this?

 There is also a complete legislation to make food - Ayurveda emphasizes on the clay and wrist brass vessels to make food.

The importance of bronze utensils is so strong - that if a bronze pot is not presented in the daughter's dowry, then the dowry is considered incomplete.

 Today, there is only one prayer from the artisans in the market - those who make them - to provide pure things to the people by not giving them adulterated salmon so that India can be benefited.

Because fake bronze is made from the sum of lead and copper, which the common man cannot identify.

Due to this dishonesty, the citizens here, due to lack of information, understand that the mess is not in the seller, but in the Indian spirituality. This is our only shortcoming.

 The day this pit will be filled, the enjoyment of every citizen of this place will be higher.

Description Hindi

|| जय चक्रधारी || काँसा गिलास:- आइये बात करते हैं, एक और अनसुलझे पहलु पर | “धातु – कांसा ” समाज में आज हर घर में जगह बनाली है, स्टील और एल्युमीनियम के बर्तनो ने – लोग अपनी संस्कृति के प्रति इतने लापरवाह हो चुके हैं, के हर भारत की वैज्ञानिक वस्तु को अपनी दृष्टि से ओझल कर देते हैं | एल्युमीनियम और स्टील रोगो का भण्डार है, ना जाने नव युग यह कब समझेगा | जिस घर में जाओ, वह स्टील या एल्युमीनियम से या हड्डियों के चूरे से बने चाय के कपो से स्वागत कर लोग इठलाते हैं, के उनकी तारीफ करो के आप कितना अच्छा काम कर रहे हैं | उनको बोल दें – के यह नकली बर्तन फेंक दो – तो किसी भी व्यक्ति को मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है | कांसा – एक योग है, जिसमे वंग और ताम्र का संयोग करवाया जाता है | जिसका अनुपात ही वस्तुओ की योग्यता बदल देता हैं – जैसे – बर्तन हेतु – १:९ का अनुपात, घुँघरू हेतु १:३ का अनुपात, बन्दूक की गोली हेतु – १००:१०:२ ताम्र,वंग,नाग | खैर मूल बात हमारी है आज की – भोजन यदि कांसी में रख परोसा जाए, जो भोजन की योग्यता समाप्त नहीं होती, साथ ही उन उर्जाओ का संचार भोजन के माध्यम से होता है जिससे – नेत्र रोग में आराम मिले, कृमि रोग में आराम मिले, यहाँ तक की चर्म रोग में भी लाभदायक है | अब भारत का विज्ञान इतना तीव्र सटीक है – के भोजन के पात्र कैसे हो, इनपर भी मानव कल्याण देखता है | इससे बढ़कर सूक्ष्मता क्या हो सकती भला ? भोजन बनाने का भी एक पूरा विधान है – आयुर्वेद भोजन बनाने हेतु – मिट्टी और कलाई किये हुए पीतल पात्रो पर ही बल देता है | कांसे के बर्तनो का महत्त्व इतना प्रबल है – के यदि बेटी के दहेज़ में – कांसे का बर्तन भेंट में न दिए जाए तो दहेज़ अधूरा ही माना जाता है | आज बाजार में जो कारीगर हैं – जो बनाते हैं, उनसे एक ही प्रार्थना है – के लोगों को मिलावटी सामन न देकर शुद्ध चीज़ उपलब्ध करवाओ ताकि भारत का कल्याण हो सके | क्युकी नकली कांसा – सीसे और ताम्बे के योग से बना दिया जाता है, जिसकी पहचान आम आदमी नहीं कर पाता | इस बेईमानी के कारण यहाँ का नागरिक, जानकारी न होने के कारण, समझने लगता है के गड़बड़ बेचने वाले में नहीं बल्कि – भारतीय अध्यात्म में है | बस यही हमारी कमी है | जिस दिन इस गड्ढे को पाट दिया जायेगा, यहाँ के हर नागरिक का आनंद और ऊँचा होगा |

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