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KANSA HAND MASSAGER – काँसा हस्त यन्त्र

KHM

Rs.1400

Advantages of Kansa :

कांसा के फायदे :

According to Ayurveda, it enhances intelligence.

आयुर्वेद के अनुसार, यह बुद्धि को बढ़ाता है।

It is believed that the use of Kansa in addition to purifying our food and drinking water on a daily basis enhances our immunity.

यह माना जाता है कि कांसा का उपयोग हमारे भोजन को शुद्ध करने और दैनिक आधार पर पीने के पानी के अलावा हमारी प्रतिरक्षा को बढ़ाता है।

Kansa is a good conductor of heat and retains heat well while keeping foods and its contents longer.

कांसा गर्मी का एक अच्छा संवाहक है और खाद्य पदार्थों और इसकी सामग्री को अधिक समय तक बनाए रखते हुए गर्मी को अच्छी तरह से बरकरार रखता है।

Kansa utensils disinfect objects based on the type and concentration of pathogens and the medium in which they occur kills these microorganisms from minutes to hours of exposure.

कांसा के बर्तन रोगजनकों के प्रकार और सांद्रता के आधार पर वस्तुओं को कीटाणुरहित करते हैं और जिस माध्यम में वे होते हैं वह इन सूक्ष्म जीवाणुओं को मिनटों से घंटों के संपर्क में मार देता है।

The potential efficacy of its components improves indoor air quality.

इसके घटकों की संभावित प्रभावकारिता इनडोर वायु गुणवत्ता में सुधार करती है।

It is suitable for daily use because it is wear and tear resistant, bright, scratch and wrinkle resistant for decades.

यह दैनिक उपयोग के लिए उपयुक्त है क्योंकि यह पहनने और आंसू प्रतिरोधी, उज्ज्वल, खरोंच और दशकों के लिए शिकन प्रतिरोधी है।

It is equally valuable after damage, as about 90% of all metals are recycled.

यह क्षति के बाद समान रूप से मूल्यवान है, क्योंकि सभी धातुओं का लगभग 90% पुनर्नवीनीकरण किया जाता है।

Product Dimension
normal size Gram
Product Weight
NIL Gram
Packet Weight
nil Gram
Packet Dimension
nil Gram

Description

Today we will talk about flourishing in society

|| Jai Chakradhari ||


Today we will talk about the flourishing in the society - a deep problem of eye light - modern age has brought many technologies - first - glasses - after - lenses - then - laser treatment.


 Now we will talk about Ayurveda - Our sages have already given the method of how to maintain the power of the eye light in the body for 100 years in Ayurveda. Allopathy was probably not even born then. The only thing to do today is to do this - if we bring that knowledge back to practical life, then the matter will be such that - the eye light will not be spoiled, and if it is bad then it will be corrected again. This is the power of Ayurveda -


Let us put a little cognizance on this:


I1. Make saliva in your eyes before dawn


2. In the morning, wash your eyes with the water of Triphala in such a way that there is complete water of Triphala in the mouth and continuously splash your eyes with that water 50 times in a row.


.3. Drink desi ghee


6. Every night, make sure to massage your feet with a brass instrument.


.5. Take some medicines.


 From the above points - it comes out - what is the style of massaging? So this is the simplest way - to hold the device with your hand and massage it - or else make such a machine that gives massage to the soles.


 How to massage Talvo?


How does the light of the eyes grow through the eyes?


 How to use Desi cow's Bilona Ghee?


 How will all this work if we use crude granulated oil?


 Swarna Bhasma - How it is helpful in eye light?


 How long to massage?


 Which medicine to take?


 You will definitely get answers to all the questions in the video.

Description Hindi

|| जय चक्रधारी || आज बात करेंगे समाज में पनप रही – एक गहरी समस्या नेत्र ज्योति की – आधुनिक युग कई तकनीक ले आये – पहले – चश्मा — पश्चात – लेंस – फिर — लेज़र ट्रीटमेंट । अब बात करेंगे आयुर्वेद की – आयुर्वेद में 100 वर्ष तक नेत्र ज्योति स्थिर रखने की ताकत शरीर में कैसे पैदा हो, इसकी विधि हमारे ऋषि पहले ही दे गए । तब संभवतः एलॉपथी का जन्म भी नहीं हुआ था । आज केवल करना है तो यही करना है – के उस ज्ञान को पुनः अध्यन्न कर हम व्यावहारिक जीवन में ले आये तो मामला ऐसा हो जायेगा के – नेत्र ज्योति ख़राब ही नहीं होगी, और यदि ख़राब हो गयी है तो पुनः दुरस्त हो जाएगी। यह है आयुर्वेद की ताकत — आइये डालते हैं थोड़ा इसपर संज्ञान : I१। सुबह की पहले लार अपने नेत्रों में अंजन करें ।२। प्रातः निहार मुँह नेत्रों को – त्रिफला के जल से इस प्रकार धोइये, के मुँह में भी पूर्ण रूप से त्रिफला का जल हो और लगातार 50 बार अपने नेत्रों को उस जल से छींटे लगाइये ।३। देसी गाय के बिलोने घी का सेवन करें ।४। रोज रात्रि में अपने पैरो के तलवो की मसाज कांसा यन्त्र से अवश्य करें ।५। कुछ औषिधियों का सेवन करें । उपरोक्त बिंदुओं में से – बात यह निकल कर आती है – के मसाज करने की शैली क्या हो? तो सीधा तरीका यही है – के अपने हाथ से यन्त्र पकड़ कर मसाज करी जाये – या फिर ऐसी मशीन ही बना दी जाये जो तलवो को मालिश कर देवे । तलवो की मालिश कैसे करनी है ? तलवो के माध्यम से नेत्रों की ज्योति कैसे बढ़ती है ? देसी गाय का बिलोना घी कैसे प्रयोग करना है ? कच्ची घानी के तेल का प्रयोग करेंगे तो यह सब कैसे कारगर होगा ? स्वर्ण भस्म – नेत्र ज्योति में कैसे सहायक होती है ? कितनी देर तक मसाज करनी है ? कौन कौनसी औषिधि लेनी है ? इत्यादि समस्त प्रश्नो के उत्तर आपको वीडियो में अवश्य ही मिलेंगे ।

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