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RUDRAKSH MALA – रुद्राक्ष माला

KRM5F

Rs.351

Bbenefits of wearing a Rudraksha beads Mala

रुद्राक्ष की माला पहनने से क्या लाभ

increase the ability to focus

ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ाएं

give clarity and peace of mind

स्पष्टता और मन की शांति दे

improve memory

याददाश्त में सुधार

relieve stress and anxiety

तनाव और चिंता से छुटकारा

increase stamina

सहनशक्ति बढ़ाएं

strengthen the heart

दिल मजबूत

balances the nervous system

तंत्रिका तंत्र को संतुलित करता है

bestow divine protection

ईश्वरीय सुरक्षा प्रदान करना

increase abundance and prosperity.

प्रचुरता और समृद्धि में वृद्धि।

Product Dimension
normal size Gram
Product Weight
20 Gram
Packet Weight
nil Gram
Packet Dimension
nil Gram

Description

Rudraksh mala:-
|| Jai Chakradhari ||
Rudraksha Mala: -
Siddha Mala is the best for all zodiac signs.
It helps to overcome intellectual deficiency, helps in gaining trust and insight.
It is highly beneficial for students, scholars, teachers, writers, journalists and researchers.
It is highly recommended for those preparing for competitive exams. It helps singers and public speakers achieve greater success in their respective fields.
Rudraksha Mala is such a garland - which can be chanted mantras of every deity.

Mala of Rudraksha: All the mantras of Lord Shankar are chanted by Rudraksha's garland which are proved immediately. The basic mantra of Shiva is ? Namah: Shivaaya. By chanting this mantra continuously, one gets a worry-free life. This mantra provides peace and coolness in life. Saying this Shiva Mantra while offering water and bilvapatra to the Shivling and chanting it with a rosary of Rudraksha. This mantra of three words is mahamantra.
Rudraksh: It is well-being, Mars provider and ayushyavardhaka. Panchamukhi Rudraksha is considered extremely useful for the people of Aries, Sagittarius, Pisces, Lagna. This garland is generally considered useful for the chanting of all mantras. The beads of small grains of Rudraksha are considered more auspicious. The larger the rosary, the cheaper it is.
- It is considered to be the most auspicious and powerful. With this garland each mantra can be chanted. The smaller the rosary of Rudraksh the smaller the grain will be, the more useful it will be. To get the grace of Lord Shiva, one should wear it around the neck.

Apart from this, for the victory over death, Mahamrantyujaya mantra: ? Trimbakam Yajamhe Sugandhimpushivardhanam. Urvarukamiv Bandhanamantriksamal Matrimonial.

According to Padma Purana, Shiva Mahapuran, the wearer gets Shiva lok. Rudraksh is an omnipresent, auspicious and auspicious. Five-faced Rudrakh is considered very useful for the people of Aries, Sagittarius, Pisces, Lagna. This garland is generally considered useful for the chanting of all mantras. The garland of small grains of Rudraksha is considered more auspicious. The larger the beads of the garland, the cheaper it is. Wear this garland only after asking any astrology. It can control or control your blood pressure. Usually one to fourteen-faced Rudraksh garland is made. It is said that there is a law to wear garlands of 26 grains on the head, neck of 50, arms of 16 and 12 of garlands in the mind. Wearing a garland of 108 grains gives the fruits of Ashwamedha Yagya. According to Padma Purana, Shiva Mahapuran, the wearer gets Shivaloka.
It is said in Shivpuran-
As such f dhishte loke rudraksh: falaad: auspicious:.
Na and vindante anya ch malika parmeshwari.
That is, like any rosary of Rudraksha in the world, no other garland is fruitful and auspicious.
It is written in Shrimad Devi Bhagwat-
Rudraksh Dharanch is the best and not the best student.
That is, there is nothing in the world more than wearing Rudraksha. The rosary of Rudraksh is revered by the wearer.

Beej Mantra - Om Hrim Namah, Daitya Mantra - Om Namah Shivaya.

Description Hindi

|| जय चक्रधारी || रुद्राक्ष माला:- सिद्ध माला सभी राशियों के लिए सर्वश्रेष्ठ है। यह बौद्धिक कमी को दूर करने में मदद करता है , विश्वास और अंतर्दृष्टि प्राप्त करने में मदद करता है। यह छात्रों, विद्वानों, शिक्षकों, लेखकों, पत्रकारों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यधिक फायदेमंद है। यह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए अत्यधिक अनुशंसित है। यह गायकों और सार्वजनिक वक्ताओं को उनके संबंधित क्षेत्रों में अधिक से अधिक सफलता प्राप्त करने में मदद करता है। रुद्राक्ष माला ऐसी माला है - जिसे हर देवी देवता के मंत्र जाप किये जा सकते हैं | रुद्राक्ष की माला : रुद्राक्ष की माला से भगवान शंकर के सभी मंत्रों का जप किया जाता है जो तुरंत ही सिद्ध हो जाते हैं। शिव का मूल मंत्र है- ॐ नम: शिवाय। इस मंत्र का निरंतर जप करते रहने से चिंतामुक्त जीवन मिलता है। यह मंत्र जीवन में शांति और शीतलता प्रदान करता है। शिवलिंग पर जल व बिल्वपत्र चढ़ाते हुए यह शिव मंत्र बोलें व रुद्राक्ष की माला से जप भी करें। तीन शब्दों का यह मंत्र महामंत्र है। रुद्राक्ष : यह सर्वकल्याणकारी, मंगल प्रदाता एवं आयुष्यवर्द्धक है। पंचमुखी रुद्राक्ष मेष, धनु, मीन, लग्न के जातकों के लिए अत्यंत उपयोगी माना गया है। यह माला सामान्यत: सभी मंत्रों के जप के लिए उपयोगी मानी गई है। रुद्राक्ष की छोटे दानों की माला अधिक शुभ मानी जाती है। जितने बड़े दानों की माला होती है, उतनी ही वह सस्ती भी होती है। - सबसे अधिक शुभ और शक्तिशाली माना जाता है।इस माला से प्रत्येक मंत्र का जप किया जा सकता है।जितने छोटे दाने की रुद्राक्ष की माला होगी उतनाही अधिक उपयोगी होगी। भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिये, गले मे धारण करना चाहिए। इसके अलावा मृत्यु पर विजय के लिए महामृंत्युजय मंत्र : ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंपुष्टिवर्द्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धानान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।। पद्म पुराण, शिव महापुराण अनुसार इसे पहनने वाले को शिव लोक मिलता है। रुद्राक्ष यह सर्वकल्याणाकारी, मंगलप्रदाता एवं आयुष्यवर्द्धक है। पांचमुखी रुद्राख मेष, धनु, मीन, लग्न के जातकों के लिए अत्यन्त उपयोगी माना गया है। यह माला सामान्यत: सभी मंत्रों के जप के लिए उपयोगी मानी गई है। रूद्राक्ष की छोटे दानों की माला अधिक शुभ मानी जाती है। जितने बड़े दानों की माला होती है उतनी ही वह सस्ती भी होती है। यह माला किसी ज्योतिष से पूछकर ही पहनें। यह आपके रक्तचाप को कंट्रोल या अनकंट्रोल कर सकती है। आमतौर पर एक से लेकर चौदहमुखी रुद्राक्ष की माला बनाई जाती है। कहते हैं कि 26 दानों की माला सिर पर, 50 की गले में, 16 की बांहों में और 12 की माला मणिबंध में पहनने का विधान है। 108 दानों की माला पहनने से अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है। पद्म पुराण, शिव महापुराण अनुसार इसे पहनने वाले को शिवलोक मिलता है। शिवपुराण में कहा गया है- यथा च दृश्यते लोके रुद्राक्ष: फलद: शुभ:। न तथा दृश्यन्ते अन्या च मालिका परमेश्वरि।। अर्थात : विश्व में रुद्राक्ष की माला की तरह दूसरी कोई माला फल देने वाली और शुभ नहीं है। श्रीमद् देवी भागवत में लिखा है- रुद्राक्ष धारणच्च श्रेष्ठ न किचदपि विद्यते। अर्थात : विश्व में रुद्राक्ष धारण से बढ़कर कोई दूसरी चीज नहीं है। रुद्राक्ष की माला श्रद्धा से पहनने वाले इंसान की आध्यात्मिक तरक्की होती है। बीज मंत्र- ओम् ह्रीं नमः, दैत्य मंत्र- ओम नमः शिवाय।

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