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CHAKRADHARI

Panchjanya Shell - पाञ्चजन्य शंख

SKU: J5
US $ 7.84
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समुद्र मंथन के दोरान इसकी उत्पति हुई थी, महाभारत में श्री कृष्ण ने इस शंख से पांडव सेना में उत्साह का संचार किया था इस शंख की गर्जना से दुष्ट कोरवों की सेना में भय व्याप्त हो जाता था,यहे दिव्ये शंख रहू और केतु के दुर्भावो को भी कम करता है|
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Description

PANCHJANYA SHANKH - causes and treatment

This conch originated during the churning of the ocean. Lord Vishnu received the Panchajanya, which is considered to be a divinity in its own right. It is held in the upper left hand of Lord Vishnu,Vishnu's fire-emanating conch was named Panchajanya, The word Panchjanya means something collectively produced from the five elements i.e.fire, water, sky, air and earth. Panchajanya is also widely associated with Sri Krishna. He blew it in the great Kurukshetra battle. Blowing of Panchajanya Shankh instantly removes all types of negativity from the environs. Panchajanya Shankh brings prosperity, harmony, wealth and material attainments. The most important thing is that blowing a conch shell without washing it with Ganges water does not yield fruit. Before blowing the conch, it is mandatory to sanctify it with Ganga water every time. The Panchajanya Shankh has great importance in Vastu Shastra as it is said to free the house from all kinds of Vastu Doshas. This divine conch shell also reduces the ill effects of Rahu and Ketu.

They should chant this mantra to destroy the inauspicious effects of Rahu and Ketu by including conch shell in the worship work-

त्वंपुरा सागरोत्पन्न विष्णुनाविघृतःकरे ।
देवैश्चपूजितः सर्वथौपाच्चजन्यमनोस्तुते ॥

सरल भाव:
त्वं पुरा सागरोत्पन्न विष्णुना विधृत: करे ।
देवैश्चपूजितः सर्वथौ पाञ्चजन्य नमोऽस्तु ते ॥
 

पाञ्चजन्य शंख: - कारण और उपचार

इस शंख की उत्पति समुद्र मंथन के दोरान हुई थी समुद्र मंथन से प्राप्त 16 रत्नों में से 6 वा रत्न शंख था भगवान विष्णु ने पाञ्चजन्य को अपने ऊपरी बाएँ हाथ में धारण किया | पंच तत्वों को धारण करने वाले इस शंख का नाम पाञ्चजन्य शंख दिया गया 5 उंगलियों की आकृति वाला पाञ्चजन्य शब्द का अर्थ है पांच तत्व, अर्थात अग्नि, जल, आकाश, वायु और पृथ्वी से सामूहिक रूप से उत्पन्न कुछ| पंचजन्य शंख श्री कृष्ण के साथ व्यापक रूप से जुड़ा हुआ है महाभारत के युद्ध में पांड्वो की सेना में उत्साह का संचार करने वाले इस शंख की ध्वनि से संपून युद्ध भूमि में शत्रु सेना में भये व्याप्त हो जाता था | पाञ्चजन्य शंख बजाने से वातावरण से सभी प्रकार की नकारात्मकता तुरंत दूर हो जाती है।पाञ्चजन्य शंख समृद्धि, सद्भाव, धन और भौतिक प्राप्ति लाता है। सबसे अहम बात यह है कि बिना गंगाजल से धोए शंख बजाने से फल की प्राप्ति नहीं होती है। शंख बजाने से पहले हर बार उसे गंगा जल से पवित्र करना अनिवार्य है। वास्तु शास्त्र में पाञ्चजन्य शंख का बहुत महत्व है क्योंकि इससे घर के सभी प्रकार के वास्तु दोषों से मुक्त हुआ जा सकता है  यहे दिव्ये शंख रहू और केतु के दुर्भावो को भी कम करता है|  

शंख को पूजा कार्य मे सम्लित करने वे राहु और केतु के अशुभ प्रभावों का नाश करने हेतु इस मंत्र का उचार्ण करे -

त्वंपुरा सागरोत्पन्न विष्णुनाविघृतःकरे ।
देवैश्चपूजितः सर्वथौपाच्चजन्यमनोस्तुते ॥

सरल भाव:
त्वं पुरा सागरोत्पन्न विष्णुना विधृत: करे ।
देवैश्चपूजितः सर्वथौ पाञ्चजन्य नमोऽस्तु ते ॥

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