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  • Round Small Dakshinavarti (South Facing) Shell -  छोटा दक्षिणावर्ती शंख
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CHAKRADHARI

Round Small Dakshinavarti (South Facing) Shell - छोटा दक्षिणावर्ती शंख

SKU: SDS-4
US $ 112.00
(Inclusive of all taxes)
पुराणों के अनुसार शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। प्रकृति में पचास हजार से भी अधिक प्रकार के शंख पाए जाते हैं। जिनका अपना-अपना महत्व है। दक्षिणावर्ती शंख को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। According to the Puranas, the conch shell was originated from the churning of the ocean. There are more than fifty thousand types of conch shells found in nature. which have their own importance. Dakshinavarti conch has an important place.
Made In India
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Description

Round Dakshinavarti Shell

Conch has immense glory and utility in Indian culture. It has special utility in the worship of gods and goddesses in astrology and tantric practices and in the beginning of auspicious works. According to the Puranas, the conch shell was originated from the churning of the ocean. There are more than fifty thousand types of conch shells found in nature. which have their own importance. Dakshinavarti conch has an important place. Dakshinavarti conch is that which is held with the right hand. This conch, which gives infinite fruit, is very important. Its sound destroys all obstacles. Establishment of this conch gives life, fame and wealth. Every kind of evil is destroyed from the place where clean water is sprinkled in the southern conch shell. Any kind of upper power is not able to exert its influence. In any auspicious time, after anointing the Dakshinavarti conch with Gangajal, Goghrit, raw milk, honey, jaggery etc., install it on the seat of a red cloth in your place of worship, this will make Lakshmi eternal. Permanent residence will remain.

 

Dakshinavarti Shell Mantra-

‘ॐ श्री लक्ष्मी सहोदराय नम:’



गोल दक्षिणावर्ती शंख

भारतीय संस्कृति में शंख की अपार महिमा एवं उपयोगिता है। देवी-देवताओं के पूजन में ज्योतिष और तांत्रिक साधनाओं और मांगलिक कार्यों के प्रारम्भ में इसकी विशेष उपयोगिता है। पुराणों के अनुसार शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। प्रकृति में पचास हजार से भी अधिक प्रकार के शंख पाए जाते हैं। जिनका अपना-अपना महत्व है। दक्षिणावर्ती शंख को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। दक्षिणावर्ति शंख वो होता है जो दाहिने हाथ से पकड़ा जाता है। अनंत फल प्रदान करने वाला यह शंख विशेष महत्वपूर्ण है। इसके नाद से सभी बाधाएं नष्ट हो जाती हैं। इस शंख की स्थापना से आयु, यश, धन की प्राप्ति होती है। दक्षिणवर्ती शंख में स्वच्छ जल भरकर जिस स्थान पर छिड़का जाता है, वहां से हर तरह की बुराई का नाश होता है। किसी भी तरह की ऊपरी शक्ति अपना प्रभाव नहीं जमा पाती।किसी शुभ मुहूर्त में दक्षिणावर्ती शंख को गंगाजल, गोघृत, कच्चा दूध, मधु, गुड़ आदि से अभिषेक करके अपने पूजा स्थल में लाल कपड़े के आसन पर स्थापित कर लीजिए, इससे लक्ष्मी का चिर स्थायी वास बना रहेगा।  


प्रतिदिन इस मंत्र का कम से कम पांच बार जाप करें,आर्थिक अभाव दूर होंगे-

‘ॐ श्री लक्ष्मी सहोदराय नम:’


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