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COPPER -

Tamba, a metal known by the names of Tamra, Triyambak, Ravipriya, Suryaloh, etc., is a very quality metal.

It is also cheaper than gold and silver and it is also helpful in giving good results in human life.

It is such a metal, which can make nectar and can also make poison.

It is like a double edged sword, now you must know how to use it properly.

This metal is also obtained in both the Free State and the containing state from the earth.
Two types of Tamra are found on this earth

1. Nepaliya - That which is acceptable, pure form.

2. Mallech - that which is worth discarding, is adulterated.

 

It was extracted in large quantities from the Nepal region of unbroken India, today these two types of copper can also be separated on the basis of virtue.
Today the condition of copper remains the same, where only adulterated copper is seen. The people of the society do not know what has happened, getting the object in its pure form is becoming like giving a hand in the mouth of a lion.

You will think that what this has to do with purity - then know this, if metallurgy is used for progress in human life, then metals give you results only when they are in a pure state.

The properties of Nepalia copper which are visible in 99.9% pure copper are -

= aliphatic - be soft, pinkish red, which is called copper element, be dense, and remain unblemished from heat when heated in fire.

Such copper remains of the highest quality and such copper is usable.

This metal proves to be a very useful metal in life in coins, in some special ornaments, in utensils, in transmission of energy, in making ashes etc., in manufacturing of alloys, and many more.

One special thing should be kept in mind here that if you use adulterated or fake copper in life, then the beauty of the body and the luster of the body gets destroyed. Blood disorders arise, delusions start in life, a person becomes restless due to disease, the metals of the body start drying up, and semen starts deteriorating.

Therefore it is best to be careful and use pure metal only.
 The results of pure copper that have come out with your cooperation are astonishing. May God always keep us ready in your service is such a prayer.

 

|| May the flag of Om stay high ||


धातु ताम्बा-

|| जय चक्रधारी ||

 

ताम्र, त्रियम्बक, रविप्रिय, सूर्यलोह, आदि नामों से प्रख्यात धातु ताम्बा, एक बहुत ही गुणवान धातु है |

यह स्वर्ण और चाँदी के मुकाबले सस्ती भी है और मानव जीवन में अच्छे परिणाम देने में सहायक भी है |

यह एक ऐसी धातु है, जो अमृत का निर्माण भी कर सकती है और विष का भी निर्माण कर सकती है |

यह द्विधारी तलवार के समान है, अब सही उपयोग आपको करना आना चाहिए |

यह धातु भी मुक्त अवस्था और युक्त अवस्था दोनों में प्राप्त की जाती है धरती से |

 

दो प्रकार के ताम्रा इस पृथ्वी पर पाए जाते हैं

१. नेपालिया - जो ग्रहण करने योग्य है, शुद्ध स्वरुप है |

२. मल्लेछ - जो त्यागने योग्य है, मिलावटी है |

 

अखंडित भारत के नेपाल क्षेत्र से यह बड़ी मात्रा में निकाला जाता था, आज इन दो प्रकार के तांबों को गुण धर्म के आधार पर भी अलग किया जा सकता है |

आज ताम्बे की स्तिथि भी यही बनी हुई है, के जहाँ देखो मिलावटी ताम्बा ही दिखाई देता है | समाज के लोगों को पता नहीं क्या हो गया है, के शुद्ध रूप में वस्तु प्राप्त करना आज कल शेर के मुख में हाथ देने के समान होता जा रहा है |

आप सोचेंगे के ऐसा भी क्या लेना देना है शुद्धता का - तो यह जान लीजिये, के मानव जीवन में उन्नति हेतु यदि धातु शास्त्र का सहारा लिया जाता है तो धातुएं आपको परिणाम तभी देती है जब वह शुद्ध अवस्था में हों |

 

99.9% शुद्ध ताम्बे में जो नेपालिया ताम्बे के गुण धर्म दिखाई देते हैं वह है -

=  स्निग्ध - मृदु हो, गुलाबी लाल हो जिसे ताम्र तत्व कहते हैं, घनाघातक्षंम हो, अग्नि में तपने पर निर्विकार रहे |

ऐसा ताम्रा उच्चस्त कोटि का रहता है व ऐसा ही ताम्र उपयोग करने योग्य है |

 

यह धातु सिक्कों में, कुछ विशेष आभूषणों में, बर्तनों में, ऊर्जा के संचरण में, भस्म आदि बनाने में, मिश्रा धातुओं का निर्माण करने में, और भी बहुत कुछ आदि में जीवन में बहुत ही उपयोगी धातु सिद्ध होती है |

 

एक विशेष बात का यहाँ यह ध्यान रखना चाहिए के यदि आप जीवन में मिलावटी या नकली ताम्बा प्रयोग करते हैं तो शरीर की शोभा एवं शरीर की कान्ति ही नष्ट हो जाती है | रक्तविकार उत्पन्न होते हैं, जीवन में भ्रम होने लगते हैं, रोग होकर व्यक्ति बेचैन होने लग जाता है, शरीर की धातुएं सूखने लगती हैं, शुक्र ख़राब होने लगता है |

 

इसलिए सावधान होकर शुद्ध धातु का ही प्रयोग श्रेष्ठ है |

 

शुद्ध ताम्बे के जो परिणाम आप लोगों के सहयोग से सामने आये हैं वह अचंभित करने वाले हैं | ईश्वर सदा ही हमे आपकी सेवा में तत्पर रखे ऐसी प्रार्थना है |

 

|| ओ३म् का झंडा ऊँचा रहे ||

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