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|| Jai Chakradhari ||

Silver, a metal known by the names of Rajat, Rupayak, Shubhra, etc., is a very amazing metal.

Silver is the only metal on earth that can make energy and heat travel at the highest speed.

Writing "there is no one like silver" would be 100% appropriate.
 Mother Earth has given this metal to human beings only as a boon. Indians have had special knowledge of this metal since the Vedic age. In the Charak Samhita of Ayurveda, there is a lot of praise for this metal and it has been mentioned to enter human life by making different types of vessels. For example, the instrument "Basti Eye" should be of pure silver.

Silver metal is found in both the combined state and the free state. Among the types of silver, it is popular -

1. Sahaj silver - which is considered to be very good,

2. Silver (mineral form) from the mine - it is considered worthy after that.

3. Artificial silver - it is not fake, but it is made with rasavidya.
Today it has become very difficult to distinguish between these types of moonshine metal.

Therefore, if the same qualities are found in silver, then it will be called the best silver.

Let us know some of its properties -

1. It should be in its purest form - 99.9% pure.

2. Solid, clean, heavy, aliphatic, white in color when heated or cut, soft, as clean as the moon, fine like a conch shell, smooth and without dents.

3. Should be malleable and ductile.
Even today there is a saying for silver - "Born with silver spoon" i.e. baby born with silver spoon. It denotes prosperity.

In order to protect them from harmful viruses etc. which are spread in the environment, first the king used to make clothes from its wires and wear them.

This metal is also very useful in the manufacture of medicines, even its ashes and medicines are also made.
Talking further, its ornaments and utensils can also be made and brought in construction.

This is a very wonderful eye-loving metal.

 From the process of thinking and understanding of the mind, this metal increases the powers of performance in a very unique way, which proves to be very useful in the life of any person.

What we have researched on this, by making its objects or works of art, we are presenting it at your service by molding it into a form that can be useful to human beings.

 || Let the Aum flag stay high ||

|| जय चक्रधारी ||

 रजत, रुपयक, शुभ्र, आदि नामो से प्रख्यात धातु चांदी, एक बहुत ही आश्चर्यजनक धातु है |

चाँदी अकेली ही पृथ्वी पर ऐसी धातु है जो ऊर्जा को एवं ऊष्मा को सर्वाधिक गति से यात्रा करवा सकती है |

" चाँदी जैसा कोई नहीं " ऐसा लिखना शत प्रतिशत उचित होगा |

धरती माता ने मानव को यह धातु एक वरदान के रूप में ही प्रदान की है | वेदकालीन युग से ही भारतियों को इस धातु का विशेष ज्ञान रहा है | आयुर्वेद की चरक संहिता में इन तो इस धातु के प्रति बहुत वाह वाह करी है एवं इसमें भांति भांति के पात्र बनाकर मानव जीवन में उतरने का उल्लेख किया है | उदाहरण स्वरूप उपकरण "बस्ती नेत्र" शुद्ध रजत का होना चाहिए |

 चाँदी धातु युक्तावस्था एवं मुक्तावस्था दोनों में प्राप्त होती है | चाँदी के प्रकारों में प्रचलित है -

१. सहज चाँदी - जो की अतीव उत्तम समझी जाती है,

२. खान से निकली चाँदी (खनिज स्वरूपा) - पश्चात यह योग्य मानी जाती हैं |

३. कृत्रिम चाँदी - यह नकली नहीं होती, किन्तु रसविद्या से इसका निर्माण कर दिया जाता है |

 आज इन चांदियो के प्रकारों में भेद कर पाना बहुत कठिन हो चला है |

इसलिए जो गुण धर्म सहज चाँदी के हैं, वही गुणधर्म यदि चाँदी में मिल जाये - तो उसे ही श्रेष्ठ चाँदी कहा जायेगा |

 आइये जाने इसके कुछ गुणधर्म -

१. यह सर्वाधिक शुद्ध स्वरुप में होनी चाहिए - 99.9%शुद्ध |

२. ठोस, स्वच्छ, भारी, स्निग्ध, गर्म करने पर या काटने पर श्वेत वर्ण में, मृदु,चन्द्रमा के समान स्वच्छ, शंख जैसा शुभ्र, चिकनी और कोटर रहित |

३. आघात वर्धनीय और तान्यधातु हो |

 आज भी चाँदी के लिए कहावत है - " बोर्न विथ सिल्वर स्पून " यानि चाँदी का चमचा लेकर जन्मा शिशु | यह सम्पन्नता को दर्शाता है |

नुक्सान दायी विषाणु आदि जो वातावरण में फैले होते हैं उनसे रक्षार्थ पहले राजा महाराजा इसके तारों से कपड़ो का निर्माण करके पहना करते थे |

यह धातु औषिधीय निर्माण में भी बहुत अधिक उपयोगी है, यहाँ तक की इसकी भस्म बना दवाई आदि भी बनाये जाते हैं |

और आगे बात करें तो इसके आभूषण और बर्तन बना कर भी निर्माण में लाये जा सकते हैं |

यह बहुत ही अध्भुत नेत्रप्रिय धातु है |

 मन मस्तिष्क के सोचने समझने की प्रक्रिया से लेकर, प्रदर्शन करने की शक्तियों को बहुत ही अनोखे रूप में यह धातु बढाती है, जो किसी भी व्यक्ति के जीवन में बहुत ही काम की क्रिया सिद्ध होती है |

 जो हमने इसपर शोध किया है, उसकी वस्तुए या कला कृतियाँ निर्माण कर मानव के काम आ सके उस स्वरुप में ढाल कर आपकी सेवा में उपस्थित कर रहे हैं |

 || ओ३म् का झंडा ऊँचा रहे ||

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