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|| Jai Chakradhari ||
The "iron metal" known by the names of Loham, Ayas, Kalayas, Loha, etc. has always been a very useful metal for human life. But today's era is called Iron Age. Its weapons have been prepared since ancient times. And also talking from the point of view of health, its relevance has been told to protect against many incurable diseases. Many compounds of iron such as ore, ash, churna, vati, avaleh, vatak, viti, sedimentary are described.
 India's iron in the Gupta era - which was known as steel iron, it was made by preparing iron, whose dunk was played by India all over the world. One form of this steel was spat, that is, steel, this art was also taught to the world by Indians.

It has been India where metal art was so advanced - a vivid example of which is still standing in front of the world. We are talking about Delhi - Raja Prithvi Mandir - which changed its name to Qutub Minar in today's era. Its iron pillar does not deteriorate under any condition like wind, water, sunlight, night etc.

This metal is also found in hemoglobin in the human body, which is very useful for human health. Now what we have brought in your service is beneficial for the use of human life. able to maintain health. Which we have given in detail in the next pages.
|| Let the Aum flag stay high ||


|| जय चक्रधारी || 

 लोहम, अयस, कलायस, लौह, आदि नामों से प्रख्यात "लौह धातु" मानव जीवन हेतु हमेशा से ही एक बहुत ही उपयोगी धातु रही है | किन्तु आज का युग लौह युग कहाता है | पूर्व काल से ही इसके अस्त्र शास्त्र तैयार किये जाते रहे हैं | और स्वास्थय के दृष्टिकोण से भी बात करें तो "चरक संहिता" इसकी प्रासंगिकता अनेक असाध्य रोगों से रक्षार्थ बताई गयी है | लौह के अनेक योग यथा अयस्कृति, भस्म, चूर्ण, वटी, अवलेह, वटक,विर्ती, अवसादी का वर्णन मिलता है |

गुप्तकालीन युग में भारत का लौह - जो फौलाद लौह के नाम से जाना जाता था, यह लौह को तैयार करके बनाया जाता था, जिसका डंका भारत ने पूरे विश्व में बजाया | इसी फौलाद का एक स्वरुप स्पात था यानी स्टील, यह कला भी विश्व को भारतीयों ने ही सिखाई थी |

वह भारत ही रहा है जहाँ धातु कला इतनी उन्नत थी - जिसका ज्वलंत उदाहरण आज भी दुनिया के सामने खड़ा है | हम बात कर रहे हैं दिल्ली स्तिथ - राजा पृथ्वी मंदिर - जो आज के युग में नाम परिवर्तन करके - क़ुतुब मीनार हो गया | वह का लौह स्तम्भ हवा, पानी, धुप, रात्रि आदि किसी भी अवस्था में ख़राब नहीं होता |

 यह धातु मानव शरीर में भी हीमोग्लोबिन में पायी जाती है, जो की मानव स्वास्थय हेतु बहुत ही उपयोगी है |

अब आपकी सेवा में हम जो लाये हैं, मानव जीवन के उपयोगार्थ कल्याणकारी है |

स्वास्थय बनाये रखने में सक्षम है | जिसका विस्तार हमने आगे के पन्नों में दिया है |

 || ओउम का झंडा ऊँचा रहे ||

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