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|| Jai Chakradhari ||

Gold - has always been the most popular metal by every human civilization all over the earth. Even today the love of the heart towards it has not diminished at all for mankind.

It is directly related to those energies which are capable of giving prosperity. Then whether it is economic prosperity or physical prosperity i.e. health - it is very beneficial in both. The expansion of attraction energy is always due to this.

Gold is considered the best among all metals due to its properties. The people of India have had some special love for it.

Gold is called immortal metal - because it does not dissolve in normal acid, there is no effect of evaporation on it, even if it is brought to a boil after smelting, it does not reduce i.e. weight does not decrease.
Its ornaments were worn not only by humans but also by elephants, horses, cows etc. Why so ?? Because it is this metal that gives all kinds of prosperity, animals are also healthy and prosperous because of this.

Talking about the kings and maharajas, they also used to eat food in this metal utensils. In some temples even today, Bhog is offered to God in these utensils. All these reasons are so that human beings can bring all this in their life for their welfare and take the ecstasy of life given by God.
 Now let's talk about this adulterous era - the conditions are so bad that it becomes difficult to get pure edible oil, then how to get the metal in pure form. Talking about jewelery all over India, the purest pure jewelery is available in 22 carat only. Why only 22 carat?? Because people do not know that 22 karat is made from 91.6% pure gold, the rest of the metal is kept in the form of adulteration.

Now even the government is promoting only 22 carat, it is promoting it.
Although gold is the only metal that is capable of giving results as much as it is pure, while other metals get adulterated then it stops working completely.

Now we are doing this in this era that as far as possible 99.9% pure gold ornaments or utensils or other forms like pure gold thin foil etc. are present at your service. And till now we are the first ones who are putting such emphasis in present day India. Why?? What is our greed in this?
There is only one goal that every citizen of the nation should attain every progress of life through these metals. So that he/she can be very proud of his born civilization.

 Talking about its health benefits:

1. It improves blood circulation, and reduces the chances of heart problems.

2. Gold helps in reducing the growth of cancer cells.

3. Make the person attractive by his personality, good health.

4. The person who is consuming gold reduces the chances of having heart or stomach problems.

5. The person who consumes gold reduces the chances of getting diseases like cancer, HIV/AIDS etc.

6. Consumption of gold also helps in thinking and increasing self-confidence.

7. Gold can also control any kind of infection. Gold acts as an antidote for infection-causing pathogens.

8. It regulates body temperature.

9. It also gives energy to your body and surroundings for better life and best lifestyle.

10. It proves helpful in creating a positive environment around you.

11. Swarna Bhasma is also fed to a newborn baby so that the person continues to enjoy the joy of health throughout his life.

Spiritual Benefits:

1. Helpful in Kundalini awakening.

2. Helpful in focusing the mind

3. There is going to be happiness in life - for example, if we go to the forest, the mountains, then the heart and the conscience start getting very happy while roaming - why?? Because it is the gold within the earth that, because of its presence, creates such an atmosphere.

4. What is the reason for the sages who go to the forest and do penance? Because they still have gold under the forest areas, whose energies prove to be very helpful for them in spiritual progress.

5. If there is any accomplishment, to prove it, then it is very necessary to take the help of gold.

6. If any metal can eliminate Vastu defects etc., then it is gold.

We were able to discover only this - otherwise the limits of its energies are higher, its light is capable of giving more light to life. On which we are constantly trying to search.

 Keep in mind that the most helpful of all these is gold which is 99.9% pure. With the mercy of Sudarshan Chakradhari Yogiraj Shri Krishna, we are doing this work continuously.

|| Let Aum flag of stay high ||


स्वर्ण वस्तुए:


|| जय चक्रधारी ||

 स्वर्ण - सदा से ही पूरी पृथ्वी पर हर मानव सभ्यता द्वारा सर्वाधिक लोकप्रिय धातु रही है | आज भी इसके प्रति हृदय का प्रेम मानव जाती का बिलकुल भी कम नहीं हुआ है |

इसका सीधा सम्बन्ध उन उर्जाओ से है जो समृद्धि देने में सक्षम है | फिर वह आर्थिक समृद्धि हो या शारीरिक समृद्धि अर्थात स्वास्थय - दोनों में अतीव लाभप्रद | आकर्षण ऊर्जा का विस्तार इससे सदा ही होता रहता है |

 सोने को उसके गुणों के कारण सभी धातुओं में सबसे सर्वोत्तम माना जाता है | भारतवासियो का तो इसके प्रति कुछ विशेष प्रेम ही रहा है |

स्वर्ण को अमर धातु कहा जाता है - क्युकी यह सामान्य अम्ल में नहीं घुलता, इसपर वाष्पीकरण का कोई प्रभाव नहीं होता, इसको गलाने के पश्चात यदि उबाल की स्तिथि में भी ले आया जाये तो भी यह कम नहीं होता अर्थात वजन नहीं घटता |

इसके आभूषण मानव द्वारा ही नहीं अपितु हाथी, घोड़ो, गाये आदि को भी यह पहनाये जाते थे | ऐसा क्यों ?? क्युकी यही वह धातु है वो हर प्रकार की समृद्धि देती है, पशु भी स्वस्थ समृद्ध इसी से होते हैं |

बात करें राजाओं महाराजाओं की तो वे भोजन भी इसी धातु के बर्तनों में करते थे | कुछ मंदिरो में आज भी भगवन को इन्ही बर्तनो में भोग लगाया जाता है | इन सभी कारण है ताकि - मानव अपने कल्याणार्थ यह सब अपने जीवन में उतार सके और ईश्वर द्वारा दिए जीवन का परमानंद लेवें |

 अब बात करते हैं आज के इस मिलावटखोर युग की - स्तिथिया इतनी बुरी हैं के खाने का तेल शुद्ध मिलना कठिन हो जाता है, तो फिर धातु को शुद्ध रूप में कैसे प्राप्त करें | पूरे भारत में आभूषण की बात करें तो तो सर्वाधिक शुद्ध शुद्ध आभूषण 22 कैरट में ही उपलब्ध है | क्यों 22 कैरट ही ?? क्युकी लोगों को यह नहीं पता के 22 कैरट को 91.6% शुद्ध स्वर्ण से ही बनाया जाता है, बाकी धातु इसमें मिलवट के रूप में रखी जाती है |

अब तो सर्कार भी केवल 22 कैरट को ही पदोन्नत कर रही है, इसी को बढ़ावा दे रही है |

हालाँकि स्वर्ण एकलौती ऐसी धातु है जो जितने प्रतिशत शुद्ध है उतना परिणाम देने में सक्षम है, जबकि अन्य धातुओं में मिलावट हो जाती है तो वह पूर्ण रूप से ही काम करना बंद कर देती है |

 अब हम इस युग में यह कर रहे हैं के जहां तक हो सकता है 99.9% शुद्ध स्वर्ण के आभूषण या बर्तन या अन्य रूप जैसे वर्क आदि को आपकी सेवा में उपस्थित कर रहे हैं | और अभी तक हम ही ऐसे पहले है जो वर्तमान भारत में ऐसा जोर लगा रहे हैं | क्यों?? हमारा क्या लालच इसमें....

केवल एक ही ध्येय है के राष्ट्र का हर नागरिक इन धातुओं के माध्यम से जीवन की हर उन्नति को प्राप्त करे | ताकि उसे अपनी जन्मी सभ्यता पर भरपूर गौरव हो सके |

 इसके स्वास्थ्य लाभ की बात करें तो :

१.          यह रक्त परिसंचरण में सुधार करता है, और हृदय की समस्याओं की संभावना को कम करता है।

२.         सोना कैंसर कोशिकाओं के विकास को कम करने में मदद करता है।

३.         व्यक्ति को उसके व्यक्तित्व, अच्छे स्वास्थ्य से आकर्षक बनाएं।

४.         जो व्यक्ति सोने का सेवन कर रहा है उसे दिल या पेट की समस्या होने की संभावना कम हो जाती है।

५.         जो व्यक्ति सोना का सेवन करता है, उसे कैंसर, एचआईवी/एड्स आदि जैसी बीमारियां होने की संभावना कम हो जाती है।

६.         सोने का सेवन सोचने और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मदद करता है।

७.         सोना किसी भी तरह के संक्रमण को भी नियंत्रित कर सकता है। सोना संक्रमण पैदा करने वाले रोगजनकों के लिए काल का काम करता है।

८.         यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है।

९.         यह आपके शरीर और आसपास को बेहतर जीवन और सर्वोत्तम जीवन शैली के लिए ऊर्जा भी देता है।

१०.        यह अपने आसपास सकारात्मक परिवेश बनाने में सहयक सिद्ध होता है।

११. नवजात शिशु को भी स्वर्ण भस्म इसीलिए खिलाई जाती है के जीवन पर्यन्त वह जातक स्वास्थय के आनंद को भोगता रहे |

 आध्यात्मिक लाभ :

१. कुंडलिनी जागरण में सहायक |

२. मन को एकाग्रचित्त करने में सहायक |

३. जीवन में प्रसन्नता हो देने वाला है - उदाहरण हम जंगल पहाड़ो में जाते हैं तो घुमते घुमते हृदय और अंतरात्मा बहुत प्रसन्न होने लगती है - क्यों?? क्यूंकि भूमि के भीतर वो स्वर्ण ही है जो वह उपस्थित होने के कारण ऐसे वातावण का निर्माण करता है |

४. जो साधू सन्यासी वन में जाकर तपस्या करते हैं, क्या कारण है? क्युकी उन्हें वन क्षेत्रों के निचे आज भी स्वर्ण है जिसकी ऊर्जाएं उनके लिए आध्यात्मिक उन्नति में अत्यंत सहायक सिद्ध होती हैं |

५. कोई भी सिद्धि हो, उसको सिद्ध करना हो तो स्वर्ण का सहारा लिया जाना अतीव आवश्यक है |

६. वास्तु दोष आदि को भी यदि कोई धातु समाप्त कर सकती है तो वह है स्वर्ण |

 हम इतना ही खोज कर पाए - अन्यथा इसकी उर्जाओ की सीमाएं और ऊपर है, इसका प्रकाश जीवन को और उजाला देने में सक्षम है | जिसपर हम लोग लगातार खोज करने हेतु प्रयासरत हैं |

 ध्यान रहे इन सब में सर्वाधिक सहायक वही स्वर्ण होता है जो 99.9% शुद्ध होवे| सुदर्शन चक्रधारी योगिराज श्री कृष्णा की दया से हम यह कार्य लगातार कर रहे हैं |

|| ओ३म् का झंडा ऊँचा रहे ||


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